Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 63, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 63, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
सद्वा भवत्वसद्वा चिद्यत्संकल्पयत्यभिनिविशति तत्तत्पश्यति सकला तत्सद्ब्रह्मैव चिद्भाति ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार मिथ्याज्ञान
से उपहित चिति, चाहे शास्त्रानुकूल हो, चाहे शास्त्र-विरुद्ध, जिसका कर्तव्यत्वेन संकल्प
करती हे, उस विषय में उद्युक्त होती है, अभिनिवेश से तत्-तत् विहित या निषिद्ध कर्म करके
उसके फलभोगकाल में उसको देखती हे । प्रथम सृष्टिसंकल्प से लेकर भूत-भौतिक देहो से
भोग्य आदि सृष्टि से पुरुषभोगपर्यन्त सकल प्रपंचरूप ब्रह्मचिति ही प्रतीत हो रही है, अन्य
कुछ भी नहीं हे