Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 63, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 63, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
यथोर्मितरङ्गपयसां सागरे कटकाङ्गदकेयूरैर्वा हेम्नः ।
अवयवावयविनोः संवित्काल्पनिकी द्विता न वास्तवी ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे सागर में छोटी-बड़ी तरंग और जल का, कंकण, बाजूबन्द से सोने का और अवयव
तथा अवयवी का परस्पर भेद वास्तविक नहीं है, वैसे ही यह आत्मभेद वास्तविक नहीं है,
किन्तु व्युत्पादक पुरुष की बुद्धि से परिकल्पित है