Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 63, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 63, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 63 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
सर्वात्मत्वात्समाभासं क्वचित्किंचित्प्रपश्यति ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वसाधारण को प्रकाशित करनेवाला साक्षिचैतन्य भोक्ता के अदृष्ट से उद्बुद्ध
होकर कहींपर कुछ ही वस्तु को भ्रान्ति से देखता है, तो सब ठौर उसीको देखता है और न
स्वरूप को ही देखता है