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Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 50

उनचासवाँ सर्ग समाप्त पचासवाँ सर्ग दो वैष्णवास्त्रों का युद्ध, दोनों राजाओं का रथरहित होना और राजा विदूरथ की मृत्यु का वर्णन ।

13 verse-groups

  1. Verses 1–2श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, समयोजित प्रतिभा रखनेवाले लोगों में सर्वश्रेष्…
  2. Verses 3–6राजा सिन्धु ने वैष्णव अस्त्र से अभिमन्त्रित कर जो शर अपनी प्रत्यंचा से छोडा उसके फल के अग…
  3. Verse 7तदनन्तर दूसरे राजा ने यानी विदूरथ ने भी वैष्णव अस्त्र की शान्ति के लिए वैष्णव अस्त्र का ह…
  4. Verses 8–9उससे भी बाण, शक्ति, गदा, प्रास, पट्टिश आदिरूप जलवाली अस्त्रों की नदियाँ निकलीं, जिन्होंने…
  5. Verses 10–14उक्त शस्त्रो की नदियों के ही युद्ध का विस्तारसे वर्णन करते हैं। उस युद्ध में शर से (वैष्ण…
  6. Verses 15–17वहाँ पर शूल और पत्थर कीलों की नाईं तीक्ष्ण थे, शत्रुभेदन रूप कार्य से उनकी खूब प्रशंसा हो…
  7. Verses 18–19वहाँ पर परस्पर के शस्त्रास्त्रों के टकराने से घूम रहे जाल की नाईं बिजलियाँ प्रदीप्त होती…
  8. Verses 20–26मेरे सामने इसकी क्या हस्ती हे, यों राजा विदूरथ की अवहेलना से राजा सिन्धु के स्थित होने पर…
  9. Verses 27–36तलवार का त्याग कर शक्ति ली ओर उसे शत्रु के ऊपर छोड़ा । वह शक्ति मथे जा रहे समुद्र के जल क…
  10. Verses 37–39हा बड़े खेद की बात है कि जैसे इन्द्र अपने शत्रु पर प्रहार करने के लिए वज्र को देखते हैं य…
  11. Verses 40–41यह हमारे पति को, जिनके रथ की पताका कट गई हे, रथ ध्वस्त हो गये है, घोड़े मर गये हैं, सारथि…
  12. Verses 42–49बड़े क्लेश से होश में आकर सारथि द्वारा लाये गये अन्य रथ में चढ़ रहे हमारे पति के सिन्धु द…
  13. Verse 50सारथि ने राजा विदूरथ को, जिसके वस्त्र, कवच और शरीर तलवार से काटे गये गले के छेद से बुद्बु…