Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 50, Verses 8–9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 50, verses 8–9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 50 · श्लोक 8,9
संस्कृत श्लोक
ततोऽपि निर्ययुर्नद्यो हेतीनां हतहेतयः ।
शरशक्तिगदाप्रासपट्टिशादिपयोमयाः ॥ ८ ॥
शस्त्रास्त्रसरितां तासां व्योम्नि युद्धमवर्तत ।
रोदोरन्ध्रक्षयकरं कुलशैलेन्द्रदारणम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
उससे भी बाण, शक्ति, गदा, प्रास,
पट्टिश आदिरूप जलवाली अस्त्रों की नदियाँ निकलीं, जिन्होंने पहले के वैष्णवास्त्रप्रयुक्त
अस्त्र-शस्त्रों को छिन्न-भिन्न कर दिया था। आकाश में उन शस्त्रास्त्रों की नदियों का
द्युलोक और पृथिवी के मध्यवर्ती अवकाशका भी विनाश करनेवाला तथा श्रेष्ठ कुलपर्वतों को
भी चूर-चूर कर देनेवाला युद्ध हुआ