Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 31
11 verse-groups
- Verses 1–22निकटवर्ती भीषण संग्राम की चर्चा कर रहे थे, क्रीडा में हास ओर विलासं मे उत्कण्ठित सुन्दरिय…
- Verse 23प्रसंगवश शूर आदि के लक्षण को जानने की इच्छा से श्रीरामचन्द्रजी पूछते हैं। श्रीरामचन्द्रजी…
- Verses 24–25श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, शास्त्रों में प्रतिपादित सदाचार से युक्त राजा के लिए रणभूमि म…
- Verse 26उक्त अर्थ को ही विशेषरूप से स्पष्ट करते हुए कहते हैं। जिस स्वामी का आचरण शास्त्रानुकूल नह…
- Verse 27जो यथासंभव शास्त्रप्रतिपादित विधि के अनुकूल और लोकाचार के अनुकूल आचरण करनेवाला होकर रण मे…
- Verse 28सुमते, गाय के रक्षण के लिए, ब्राह्मण के रक्षण के लिए, मित्र के रक्षण के लिए, शरणागत के रक…
- Verses 29–30अवश्य परिपालनीय (रक्षणीय) अपने देश की मुख्यवृत्ति से रक्षण मेँ जो राजा सदा उद्यमी है, उसक…
- Verses 31–32प्रजाओं के प्रति सदा कुछ न कुछ उपद्रव करने वाले राजा अथवा राजा से भिन्न जमींदार आदि राजा…
- Verses 33–34धार्मिक स्वामी का आश्रित होने पर भी यदि अधर्मा से युद्ध करता हुआ योद्धा मारा जाय, तो उसको…
- Verse 35जो लोग शास्त्रप्रतिपादित आचरणवाले प्रभुओं के लिए खड्ग की धार को सहते हैँ, वे शूर कहे जाते…
- Verse 36विद्याधरो की अंगनाओं के मधुर ओर मन्द मन्द गायन से गुलजार, मंदार के फूलों की मालाओं के गूथ…