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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 31, Verse 35

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 31, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

तेषामर्थे रणे व्योम्नि तिष्ठन्त्युत्कण्ठिताशयाः । शूरीभूतमहासत्त्वदयितोक्तिसुराङ्गनाः ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

जो लोग शास्त्रप्रतिपादित आचरणवाले प्रभुओं के लिए खड्ग की धार को सहते हैँ, वे शूर कहे जाते हैं शेष लोग डिम्भाहव मेँ मारे गये कहे जाते हैं ॥ ३ ४॥ उनके लिए रणभूमिमें ओर आकाश में शूरता को प्राप्त महाबलशाली को प्रिय कहने वाली सुरांगनाएँ उत्कण्ठित होकर खड़ी रहती हैं