Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker) · Sarga 10
8 verse-groups
- Verse 1पूर्वोक्त अर्थ का ही संक्षेप से उपसंहार कर रहे महर्षि वसिष्ठजी आचरण करने के योग्य शुभ का…
- Verses 2–3वे दोनों देश-काल से विशेषित सत्तारूप ही हैं, यह भाव है । नियति सर्वनुकूल ब्रह्मसत्तारूप ह…
- Verses 4–8तदुपरान्त जो कर्तव्य है, उसका उपदेश देते हैं । इस लोक की सिद्धि (जीवन्मुक्ति) तथा परलोक क…
- Verse 9इस प्रकार सागोपाग श्रवण की भूमिका रचकर श्रवणीय शास्त्र की (मोक्षकथा की) सिद्धि के लिए मोक…
- Verse 10श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवन्, सृष्टि के आरम्भ में भगवान् ब्रह्माजी ने किस लिए यह मोक्…
- Verses 11–22श्रीवसिष्ठजी ने कहा : श्रीरामजी, घट-घट व्यापी, सबका आधार, अखण्ड चेतन, अविनाशी, सब प्राणिय…
- Verses 23–39तप, दान और तीर्थ संसारतरण के लिए नन कर्मणा न प्रजया धनेन“ (न कर्म से, न पुत्रोत्पादन सरे…
- Verses 40–44होकर यहाँ स्थित हू, अतएव अभिमानशून्य वृत्ति से रहता हुआ मैं अज्ञानियों की बुद्धि से कार्य…