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Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 10, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 10, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

इदमुक्तं पुराकल्पे ब्रह्मणा परमेष्ठिना । सर्वदुःखक्षयकरं परमाश्वासनं श्रियः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार सागोपाग श्रवण की भूमिका रचकर श्रवणीय शास्त्र की (मोक्षकथा की) सिद्धि के लिए मोक्षकथा की प्राप्ति का प्रकार कहते हैं। &. उक्त संहिता के सुनने में मन्दविरक्त का भी अधिकार नहीं है, यह सूचित करने के लिए “अपुनर्ग्रहणाय/ ऐसा कहा है। < श्रवणशाला में अविवेकी प्रविष्ट भी न हो सकें, यह सूचित करने के लिए विवेकशील कहा । श्रीरामजी, सृष्टि के आदि में भगवान्‌ ब्रह्माजी ने सम्पूर्णं दुःखों का विनाश करनेवाली और बुद्धि को अत्यन्त शान्ति देनेवाली यह मोक्षकथा कही थी