Guru's AddaGuru's Adda

Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker) · Sarga 1

12 verse-groups

  1. Verses 1–2मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण पहला सर्ग विचार द्वारा स्वयं ज्ञात और पिता द्वारा उपदिष्ट तत्त्वज…
  2. Verses 3–4यदि उक्त परमात्मतत्त्व का ज्ञान हो गया है, तो विश्रान्ति क्यो नहीं प्राप्त हुई ? स्वभावतः…
  3. Verse 5श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : भगवान्‌ श्री व्यासजीके पुत्र श्रीशुकदेवजी की अपने ही विचार से ज्…
  4. Verses 6–14श्रीविश्वामित्रजी ने कहा : हे रामचन्द्र, मैं तुमसे श्रीव्यासजी के पुत्र शुकदेवजी का जीवनव…
  5. Verses 15–18पुत्र द्वारा यों पूछे जाने पर आत्मतत्त्वज्ञ महामुनि श्रीव्यासजी ने अपने पुत्र से सम्पूर्ण…
  6. Verses 19–27पिताजी के यों कहने पर श्रीशुकदेवजी सुमेरू पर्वत से पृथिवी में आये और महाराज जनक से संरक्ष…
  7. Verses 28–29राजा ने बड़ी शीघ्रता से शुकदेवजी का स्वागत कर उनसे कहा : महाभाग, आपने जगत में प्रसिद्ध पर…
  8. Verses 30–33श्रीविश्वामित्रजी ने कहा : यों पूछने पर जनक ने श्रीशुकदेवजी से उसी तत्त्व का उपदेश दिया ज…
  9. Verses 34–36अथवा-स्वप्रकाशरूप आत्मा में तीनो कालों मे बाधित होने ओर मिथ्या होने के कारण यह संसार (3)…
  10. Verses 37–40श्री जनकजी ने कहा : मुनिश्रेष्ठ, आपने स्वयं विचारपूर्वक जिस तत्त्व को जाना है और जिसका गु…
  11. Verse 41ब्रह्मन्‌, आपको जो पाना था, उसे आप पा गये है । इस समय आपका चित्त परिपूर्ण है आप अब दृश्य…
  12. Verses 42–45अज्ञान का विनाश होने से परम शुद्ध अतएव संचित और आगामी पुण्य ओर पाप के असंपर्क एवं विनाश स…