Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2) · Sarga 113
एक सौ ग्यारहवाँ सर्ग समाप्त एक सौ बारहवाँ सर्ग जीवन लेकर भाग रहे जिस जिस देश के पैदल भट जहाँ-जहाँ जिस प्रकार विनष्ट हुए उसका वर्णन।
39 verse-groups
- Verse 1श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, चेदिरूपी चन्दनों का वन, जहाँ मोतियों के हार, वस्त्र ओर साँप द…
- Verse 2पारसदेश के योद्धा अस्त्रप्रवाह से पत्तों की भाँति बहाये जाते हुए मोहवश आपस में प्रहार कर…
- Verse 3दरददेश के योद्धा दर्दुर पर्वतपर आरपार रहित (असीम) गुफाओं के बिलं में भय से विदीर्णहृदय हो…
- Verse 4कुल्हाड़ीरूपी चार शस्त्रास्त्रों की धारा के अग्रभाग से हुए पत्थर, कवच आदि के चूर्णरूपी बर…
- Verse 5आपस के आघातं से भग्नदन्त (जिनके दाँत टूट गये थे) देहों में रुधिर राशि से लथपथ पीड़क्रान्त…
- Verse 6भीषण तोमरों से पीटे गये दरद देश के ही कोई योद्धा रात्रि में अपने रूप से पुरुषों को मोहित…
- Verse 7दशाण्दिश के योद्धा ताल और तमाल से घने पुराने जंगल में सिंहो द्वारा गले में पैर डालकर हृदय…
- Verse 8पश्चिमसागर के तटवर्ती देशों के यवनयोद्धा वेलाभूमि में मगरो के झुण्डों से निगल लिये जाने क…
- Verse 9शक लोग रक्तमय बाणराशि को क्षण भर भी सहन न कर सके एवं रमठों के प्राण कमलिनी समूह की भाँति…
- Verse 10श्रवण नक्षत्र के संस्थान के (शरीर गठन के) समान तीन शिखराग्रों से युक्त महेन्द्र पर्वत स्व…
- Verse 11तंगणयोद्धाओं की सेना, जिसका आकार सुन्दर सुवर्णं के सदृश था, चोरों द्वारा वस्त्रादिलुण्ठनप…
- Verse 12तंगणसेना के भक्षण के समय वहाँ का भूमितल चारों ओर घूम रहे उल्मुक (लाठी) लिये हुए अतएव चमक…
- Verse 13उक्त विपश्चित् की विजय होने पर जगत्रूपी गृहगुहावाला अन्तरिक्ष लोक मेघों के पृथिवी बिलों…
- Verse 14मछलियों के विहाररूप शेवाल के छोटे से तालाब के भाम्यवश सूख जाने पर (जलशून्य होने पर) बड़ी-…
- Verse 15जीते हुए सकल द्वीपो के योद्धा सहाद्रि मेँ छिपकर सात दिन तक विश्राम कर चिकित्सा आदि द्वारा…
- Verse 16मारे भय के गन्धमादन पर्वत के पुंनाग वृक्षों के झुरमुट में इकडे हुए गान्धार देश के योद्धाओ…
- Verse 17हूण, चीन ओर किराता के सिर विपश्चित् से छोड़े गये मुँह में आग से युक्त वेगवान् चक्रों से…
- Verse 18निलीप नामक देश के योद्धा कमलनाल में उगे हुए निश्चल कोटं के समान विपश्चित के भय के मारे प्…
- Verse 19मृगों ओर पक्षियों के विहार के लिये सुन्दर रंगभूमिरूप पर्वत और वनभूमिया में विपश्चित् के…
- Verse 20करंजवन के समान कठोर कण्टक-स्थलनामक योद्धा दस्युओं के देश मे करंज आदिके वनों में छिप गये
- Verse 21पारसी योद्धा समुद्र के तरंगवेग से परलीपार पहुँच कर, वायु से पाक होकर प्रलयकाल तारों के सम…
- Verse 22समुद्र को तरगों के आन्दोलन द्वारा कूटनेवाले, पत्थरों की मार से पर्वतशिखरों पर चिह्न करनेव…
- Verse 23क्षुब्ध हुए शब्त्रासत्रों ओर वायुओं द्वारा मूसलाधार वृष्टि से सम्पन्न होकर कीचड़ ओर जल से…
- Verse 24साय साँय शब्द करनेवाले वायुओं से महासागर के प्रवाह से बरफ छप-छप शब्द के साथ पृथिवी पर गिर…
- Verse 25वायु से उड़ाये जा रहे विदूरदेश के रथिक लहरों का-सा चीत्कार करते हुए कमलो से भ्रमरो की तरह…
- Verse 26उनकी पैदल सेना तो पास में शस्त्रास्त्र राशि के रहते भी विपश्चित् की चक्रराशि से आँख के अ…
- Verse 27हूणदेश के योद्धा उत्तर सागर के रेतीले तट पर सिर तक डूबकर भूमि में गाड़ने के कारण मटमैला ह…
- Verse 28शकयोद्धाओं को पूर्वसागर की तटभूमि की एला (ईलायची) वन श्रेणियों में पहुँचाकर विपश्चित ने उ…
- Verse 29मन्द्रदेश के योद्धा धीरे-धीरे सिसकते-सिसकते द्युलोक के समान ऊँची पर्वत की चोटी से महेन्द्…
- Verse 30जो योद्धा सह्ाद्रि में प्रविष्ट हुए थे, वे तो मूकाम्बिका के समीप कुटजाढ्य नामक सह्याद्रिश…
- Verse 31दाशार्णं देश के योद्धा पुराने पत्ते के समान दर्दुराण्य में पहुँचे। वे मूर्ख विषफल खाकर वह…
- Verse 32हैहयदेश के योद्धा हिमालय मेँ काकतालीयन्याय से विशल्यकरणी ओषधि को खाकर विद्याधरो की भोति आ…
- Verse 33इसी प्रकार बंग के योद्धा भी हिमालय की औषधियाँ खाकर मनुष्यो की नाई म्लान (कुम्हलाए) शेखर प…
- Verse 34अंग देश के योद्धा विद्याधरो का पद प्रदान करनेवाले वनफलों के भक्षण से स्वर्ग में विद्याधर…
- Verse 35बेचारे मूर्च्छा को प्राप्त हो गये । वहाँपर भ्रान्तिवश विमानचारी ऐसे हो गये
- Verse 36हे वत्स, कलिंगों की चंचल और निस्सार हाथियों से युक्त चतुरंग सेना अंग देशवासी योद्धाओं से…
- Verse 37शाल्वदेश के योद्धा बाण, पत्थर और जल से युक्त शत्रुसेना के आक्रमण करने पर अपने प्रभु के सा…
- Verse 38प्रत्येक दिशा की ओर भाग रहे असंख्य योद्धा तरंगों से व्याप्त नगरों में, लीन हो गये
- Verses 39–41केवल सागरो में ही लीन नहीं हुए किन्तु खेतों में, जंगलों में, नगरों में, जलों में, स्थलों…