Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 14
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, verse 14 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
तरङ्गकणकल्लोलमहागुलुगुलाकुलान् ।
भूरिसीकरनीहारहारिहारिशरीरिणः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
मछलियों के विहाररूप शेवाल के छोटे से तालाब के
भाम्यवश सूख जाने पर (जलशून्य होने पर) बड़ी-बड़ी मछलियों के तुल्य अशरण होकर खड्गो
से जर्जर हुए अन्यान्य द्वीपो के योद्धाओं ने अपने प्राणों का परित्याग किया