Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 113, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 113 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अथार्णवांस्ते ददृशुराकाशस्यानुजानिव ।
विस्तीर्णान्विमलाकारान्पूरिताखिलदिक्तटान् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त
विपश्चित् की विजय होने पर जगत्रूपी गृहगुहावाला अन्तरिक्ष लोक मेघों के पृथिवी बिलों में
गर्जन की प्रतिध्वनि से गम्भीर घुम्-घुम् ध्वनियुक्त (विपुल मृदंगध्वनि युक्त) होकर मानो उसका
प्रचुर यश गाने के लिय उद्यत हुआ