Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2) · Sarga 112

एक सौ दसवाँ सर्ग समाप्त एक सौ ग्यारहवाँ सर्म अपनी सेना की हार होते न होते रणभूमि के लिए निकले हुए राजा द्वारा वायव्यास्त्रों से चारों ओर शत्रुओं के संहार का वर्णन।

14 verse-groups

  1. Verses 1–7श्रीवसिष्ठजी ने कहा : भद्र, इस प्रकार प्रलयतुल्य घमासान युद्ध चल रहा था, संग्राम भूमि में…
  2. Verses 8–10चतुरंगिणी महती सेना से चारों ओर धिरे हुए राजा ने अटारियों से परिवृत नगर से कठिनाई के साथ…
  3. Verses 11–15चक्राकार आवर्त के समान बह रहे सेना के व्यूहरूपी ज्वारभाट से व्याप्त थी, चल रहे सैकड़ों रथ…
  4. Verses 16–18अकाल (अनवसर मे) महाप्रलय के आविर्भाव के सदृश उसका आकार अत्यन्त घना था, खून के महासागरों न…
  5. Verses 19–20उक्तसंग्राम सागर को देखकर मैं इसका अगस्त्य (अगस्त्य ने जिस प्रकार सागर (४) सागरपक्ष में म…
  6. Verses 21–22राजा ने अपने देश के सैनिकों के हित के लिए शत्रुवध के लिए अग्निदेव को नमस्कार करके जप कर श…
  7. Verses 23–28चारों ओर वायव्यास्त्र और पर्जन्यास्त्र से युक्त अतएव अष्टमूर्ति उस भीषण धनुष से दिशाओं के…
  8. Verse 29उस श्त्रासत्र वृष्टि के वेग से वह पूर्वोक्त विशाल शत्रु-सेना सागर को शीघ्र ही धूल के ढेर…
  9. Verses 30–31जल, वज ओर शस्त्रास्त्रों की वेगवती वृष्टि तथा प्रचण्ड आँधी से शत्रुसेना बँधरहित तालाब के…
  10. Verses 32–38सेना पर्वत नदी की समता का उपपादन करते हुए भाग रही सेना का वर्णन करते है / वायु के प्रवाह…
  11. Verse 39शस्त्रास्त्ररूपी लहरों से वटवृक्षं के समान काटे गये मेघ जल से नम्र हुए थे | वर्षा से पंकय…
  12. Verse 40मार्ग बनाने के लिए भाले, त्रिशुल, गदा, वल्लो को धारण करनेवाले भाग रहे योद्धाओं से बह रहे…
  13. Verses 41–42मरे हुए हाथी, घोड़े और योद्धाओं के समूहरूपी जीर्णशीर्णं पत्तों से वह आच्छन थी, पीसे गये श…
  14. Verses 43–49गरज रहे प्रलयकाल के मेघो से, बह रहे प्रलयकाल के प्रचण्ड वायुओं से,गिर रही प्रलयकालीन मूसल…