Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 83

7 verse-groups

  1. Verse 1बयासीवाँ सर्म समाप्त तिरासीवाँ सर्ग चूडाला सिद्धि का वैभव, राजा शिखिध्वज का अज्ञान तथा गु…
  2. Verse 2मोहरूप कालिमा और तीनों तापों का उपशम (नाश) हो जाने से गंगा की नाई विमल ओर शीतल वह चूडाला…
  3. Verses 3–15उसके कल्पित कायव्यूहादि ऐश्वर्य का वर्णन करते हैं। वह अपने पति के वक्षःस्थल तथा चित्त से…
  4. Verses 16–18स्थूलारन्धतीन्याय से शिष्य की बुद्धि को आत्मा में व्यस्त कर गुरु का उपदेश ज्ञान का कारण ह…
  5. Verses 19–25वह किस अभिप्राय से एक कौड़ी इतने परिश्रम से ढूँढ़ रहा था, यह बतलाते हैं। यदि यह कौड़ी मेर…
  6. Verses 26–28तथापि (आचार्यवान्‌ पुरूषो वेद” इत्यादि श्रुति से गुरु का उपदेश आवश्यक है। फिर भी गुरु के…
  7. Verse 29हो जाने पर तो प्रारन्धशेष से जो कुछ जागतिक भ्रम अवशिष्ट रहता है उसका एकमात्र उपेक्षा से ह…