Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 83, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 83, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 83 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
अणिमादिगुणैश्वर्ययुक्ता सा नृपभामिनी ।
एवं बभूव चूडाला घनाभ्यासवती सती ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
बयासीवाँ सर्म समाप्त
तिरासीवाँ सर्ग
चूडाला सिद्धि का वैभव, राजा शिखिध्वज का अज्ञान तथा
गुरु के उपदेश की सफलता में किराट् का आख्यान |
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, पूर्वोक्त रीति से प्राणधारणादि के घनाभ्यास से युक्त
वह राजपत्नी सती चूडाला अणिमादि सिद्धियों के गुणों के ऐश्वर्य से सम्पन्न हो गयी