Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 112

9 verse-groups

  1. Verses 1–3सर्वार्थमयम्‌” इस शब्द का सव पदार्थो का सारभूत भी अर्थ है, इसको दृष्टान्तपूर्वक दशति हुए…
  2. Verse 4यत्न से जब तक उसका निवारण नहीं किया जायेगा, तब तक कैसे जन्म-मरण का भय निकलेगा, इस पर कहते…
  3. Verse 5अहंकार का बाध हो जाने पर अवशिष्ट हुआ मैं किस प्रकार का हूँ, इस पर कहते हैं । जब अहंकार का…
  4. Verses 6–13उक्त चिन्मात्ररूप मैं अहम्भाव से युक्त होकर किस तरह का हो गया। इस पर कहते हैं। जैसे जल के…
  5. Verse 14इस प्रकार प्रशसा से अभिमुख किये गये गुरुजी के प्रति “मा दुःखितो भव व्यर्थ त्वं मिथ्यापुरु…
  6. Verse 15महाराज वसिष्ठ ने कहा : हे राघव, मिथ्यापुरुष को जानने के लिए यह सुन्दर आख्यायिका आप सुनिये…
  7. Verse 16हे महावाहो, कोई एक मायायन्त्र से भरा पुरुष था, वह केवल बालक के सदृश कोमल बुद्धि से विक्षि…
  8. Verses 17–26मनुष्यों की जहाँ दृष्टि नहीं जाती, ऐसे एकान्त स्थान में भी वह स्वरूपतः मिथ्या ही था, यह क…
  9. Verses 27–35हे रघुकुलश्रेष्ठ, काल से उसका वह घर भी नष्ट हो गया । भाग्यहीन जिस किसी दिशा का ग्रहण करता…