Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 112
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- Verses 1–3सर्वार्थमयम्” इस शब्द का सव पदार्थो का सारभूत भी अर्थ है, इसको दृष्टान्तपूर्वक दशति हुए…
- Verse 4यत्न से जब तक उसका निवारण नहीं किया जायेगा, तब तक कैसे जन्म-मरण का भय निकलेगा, इस पर कहते…
- Verse 5अहंकार का बाध हो जाने पर अवशिष्ट हुआ मैं किस प्रकार का हूँ, इस पर कहते हैं । जब अहंकार का…
- Verses 6–13उक्त चिन्मात्ररूप मैं अहम्भाव से युक्त होकर किस तरह का हो गया। इस पर कहते हैं। जैसे जल के…
- Verse 14इस प्रकार प्रशसा से अभिमुख किये गये गुरुजी के प्रति “मा दुःखितो भव व्यर्थ त्वं मिथ्यापुरु…
- Verse 15महाराज वसिष्ठ ने कहा : हे राघव, मिथ्यापुरुष को जानने के लिए यह सुन्दर आख्यायिका आप सुनिये…
- Verse 16हे महावाहो, कोई एक मायायन्त्र से भरा पुरुष था, वह केवल बालक के सदृश कोमल बुद्धि से विक्षि…
- Verses 17–26मनुष्यों की जहाँ दृष्टि नहीं जाती, ऐसे एकान्त स्थान में भी वह स्वरूपतः मिथ्या ही था, यह क…
- Verses 27–35हे रघुकुलश्रेष्ठ, काल से उसका वह घर भी नष्ट हो गया । भाग्यहीन जिस किसी दिशा का ग्रहण करता…