Guru's AddaGuru's Adda

Upashama Prakarana (Dissolution) · Sarga 88

20 verse-groups

  1. Verse 1प्राप्त कर अपने हृदय में ब्रह्म का लाभ किया
  2. Verses 2–3"ओमित्येतदक्षरं सर्वम्‌” इत्यादि माण्डूक्य श्रुति में प्रदर्शित क्रम से अकार, उकार, मकार…
  3. Verse 4जिस प्रकार क्षोभशून्य चिन्तामणि अपने स्वरूप में रहता हे, वैसे ही क्षोभशून्य आकारवाले महाम…
  4. Verse 5भ्रमण से रोकने पर कुम्हार के घर में चक्र जिस प्रकार अक्षुब्ध आकारवाला रहता है, वैसे ही ये…
  5. Verses 6–7(उस प्रकार के अनेक शुभ विशेषणो से सम्पन्न महामुनि वीतहव्य ने पूर्वोक्त रीति से अध्यारोप ओ…
  6. Verse 8तदनन्तर आकाश-मण्डल में चक्षु द्वारा दिखाई पडनेवाले तमो भाग की नाई चिदाकाश में साक्षी के द…
  7. Verse 9तदनन्तर आधा क्षण विचार कर उक्त मुनि ने प्रकाशित हो रहे तेज का भी (अविद्या के सात्विक वृत्…
  8. Verse 10अनन्तर तम ओर प्रकाश से शून्य अवस्था को प्राप्त कर मुनि वीतहव्य ने कल्पना के हेतुभूत मनरूप…
  9. Verses 11–12हे श्रीरामजी, तदनन्तर वायुशून्य प्रदेश में स्थित दीपक की नाई विस्पष्ट प्रकाश को प्राप्त ह…
  10. Verse 13श्रीरामजी, तदनन्तर इस रीति से साक्षिमात्र के परिशेषस्वरूप "पश्यन्ती" पद को प्राप्तकर अनन्…
  11. Verse 14तदनन्तर समर्थ मुनि वीतहव्य पहले उक्त सुषुप्त स्थान में किंचित्‌ किचित्‌ स्थित होकर अनन्तर…
  12. Verse 15तदनन्तर उनका स्वरूप कैसा था ? इस चतुर्थ प्रश्न का उत्तर देते हैं। जैसे रात्रि मे देखनेवाल…
  13. Verse 16वे चेत्य का अभाव होने से अचिन्मय ओर स्वतः चित्स्वरूप थे । तदनन्तर “नेति नेति" इत्यादि श्र…
  14. Verse 17इसके अनन्तर ये मुनि समस्त पदार्थों में अवस्थित, समस्त भावों से वर्जित, निरतिशय समता से पू…
  15. Verse 18इससे समस्त वादियों के द्वारा अनैकविध विकल्पो से अपने-अपने सिद्धान्त रूप से विकल्पित जो पद…
  16. Verse 19कपिलमुनि-निर्मित सांख्यशास्त्र मे प्रतिपादित पुरुषरूप, पतंजलि निर्मित योगशास्त्र में प्रत…
  17. Verses 20–21आत्मा के स्वरूप को भली प्रकार जाननेवाले आत्मवादियों के मत में जो आत्मतत्व है, सौत्रान्तिक…
  18. Verse 22जो तत्त्व समस्त शास्त्र का सिद्धान्तभूत है, जो सबके हृदय में अनुगत है, जो सर्वात्मक है ओर…
  19. Verse 23होने से असर्वात्मक भी है, तत्स्वरूप होकर ये मुनि अवस्थित थे
  20. Verse 24वह वीतहव्य मुनि उक्त क्रम सेमुक्त लोगों की दृष्टि में आकाश के स्वरूप की अपेक्षा निर्मल स्…