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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

यदेतदखिलं राम भवते वर्णितं मया । यदिदं वर्णयाम्यद्य वर्णयिष्यामि यच्च वा ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर आधा क्षण विचार कर उक्त मुनि ने प्रकाशित हो रहे तेज का भी (अविद्या के सात्विक वृत्तिविशेष का भी) परित्याग कर दिया । तम और तेज दोनों का परित्याग करने से वे मुनि न तम और न प्रकाशरूप थे यानी तम और प्रकाश दोनों से शून्य अवस्था को प्राप्त हुए थे