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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 18

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

इससे समस्त वादियों के द्वारा अनैकविध विकल्पो से अपने-अपने सिद्धान्त रूप से विकल्पित जो पद है, वही पद वीतहव्य का था, ऐसा कहते है। जो शून्यवादी बुद्धो का शून्यरूप प्राप्य पद है, जो ब्रह्मज्ञानियों का ब्रह्मरूप श्रेष्ठ प्राप्त पद है, जो विज्ञानवादी बौद्धो का विज्ञानरूप निर्मल प्राप्य पद है, उस पदरूप होकर ही ये मुनि वीतहव्य स्थित थे