Guru's AddaGuru's Adda

Upashama Prakarana (Dissolution) · Sarga 3

दूसरा सर्ग समाप्त ॐ जीव और बुद्धि एक अविद्या के गर्भ से उत्पन्न हुए हैं, इसलिए बुद्धि को भगिनी कहा और अपने को भाई कहा ।

12 verse-groups

  1. Verse 1[नन शास्त्राभ्यास और सज्जनों के अनुग्रह से पीछे उत्पन्न होने के कारण सन्मति को पुत्री कहा…
  2. Verses 2–3कुछ अन्धकारवश पीले, कुछ लाल आकाश में विरल तारोंवाली दिशाओं को मानों बुहारी से छोड़ने पर प…
  3. Verse 4प्रातः काल की स्नान विधि कर ओर सन्ध्या-वन्दन आदि कर्म से निवृत्त होकर भाईयों के साथ थोडे…
  4. Verse 5पहले ही स्नान, सन्ध्या आदि से निवृत्त होकर एकान्त में समाधि में बैठे हुए आत्मपरायण मुनि क…
  5. Verses 6–7विनययुक्त वे राजकुमार उन्हे प्रणाम कर जब तक अन्धकार भली-भाँति नष्ट नहीं हो गया, दिशाएँ सा…
  6. Verse 8श्रीवसिष्ठजी का वह निवास स्थान लोगों से ठसाठस भर गया । हाथी, घोडे ओर रथों की भीड़ लग गयी…
  7. Verses 9–10एक क्षण मे श्रीवसिष्ठजी समाधि से जाग उठे । उन्होंने विनय आदि व्यवहार से और प्रिय वचन आदि…
  8. Verse 11जैसे सब देवताओं से परिवृत ब्रह्मा इन्द्र के नगर में जाते है वैसे ही विशाल वाहिनी परिवृत श…
  9. Verse 12जैसे हंसों के झुण्ड से परिवेष्टित राजहंस कमल के तालाब में प्रवेश करता है वैसे ही विनीत लो…
  10. Verse 13उनके सभा में प्रवेश करने के समय महाबली राजा दशरथ सिंहासन से शीघ्र उठकर वहाँ पर तीन कदम उन…
  11. Verses 14–16उस सभा मे उन सब दशरथ आदि राजाओं, वसिष्ठ आदि मुनियों, ऋषियों, ब्राह्मणों, सुमन्त्र आदि मन्…
  12. Verses 17–27झूल रहे बड़े-बड़े फूलों के झूलों से खूब अधिक सुगन्ध लेकर मन्द-मन्द वायु बह रहा था, झरोखों…