Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 3, Verses 6–7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 3, verses 6–7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 6,7
संस्कृत श्लोक
तं प्रणम्याङ्गणे तस्थुस्तस्मिंस्ते विनयान्विताः ।
यावत्तमः समालूनं व्यक्तं दिङ्मुखमण्डलम् ॥ ६ ॥
राजानो राजपुत्राश्च ऋषयो ब्राह्मणास्ततः ।
आययुः सदनं मौनं ब्रह्मलोकमिवामराः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
विनययुक्त वे
राजकुमार उन्हे प्रणाम कर जब तक अन्धकार भली-भाँति नष्ट नहीं हो गया, दिशाएँ साफ-साफ नहीं
दिखाई देने लगी, तब तक उस आँगन में खड़े रहे तदनन्तर राजा, महाराज, राजकुमार, ऋषि ओर
ब्राह्मण ब्रह्मलोक में देवताओं के समान चुपचाप श्रीवसिष्ठजी के स्थान पर आये