Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 3, Verses 9–10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 3, verses 9–10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 9,10
संस्कृत श्लोक
क्षणाद्वसिष्ठो भगवान्विरराम समाधितः ।
आचारेणोपचारेण जग्राह प्रणतं जनम् ॥ ९ ॥
तथानुयातो मुनिभिर्विश्वामित्रान्वितो मुनिः ।
आरुरोह रथं श्रीमान्सहसाब्जमिवाब्जजः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
एक क्षण मे श्रीवसिष्ठजी
समाधि से जाग उठे । उन्होंने विनय आदि व्यवहार से और प्रिय वचन आदि के उपचार से प्रणाम कर रहे
लोगों के ऊपर अनुग्रह किया । विश्वामित्रजी के साथ मुनि श्री वसिष्ठजी, जिनके पीछे बहुत से मुनि
चल रहे थे, जैसे ब्रह्मा कमलपर आरूढ होते हैं वैसे ही रथ पर शीघ्र आरूढ हुए