Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 68
7 verse-groups
- Verse 1पूर्व में जिसका वर्णन किया गया है, उस सृष्टिक्रम का लोक भी ठीक ऐसे ही स्वप्न में अनुभव कर…
- Verses 2–8हिमालय पर्वत के उत्तर बगल में काजल के पंक से या काजल के पर्वत से बनाई गई प्रतिमा के समान…
- Verse 9उस कर्कटी का शरीर अत्यन्त विशाल था, अपनी जाति के अनुरूप आहार उसे नहीं मिलता था, अतएव उसकी…
- Verses 10–13विचार किया-यदि मैं जम्बूद्वीप में रहनेवाले सब प्राणियों को जैसे सागर जलराशि को निगलता है,…
- Verses 14–16तो मेरी सर्वजनग्रसन मनोरथ सिद्धि कैसे होगी 2 इस शंका पर वह स्वयं कहती है। कभी परिश्रान्त…
- Verses 17–19वहाँ जाकर तप करने के लिए निश्चय कर उसने स्नान किया, तदनन्तर सूर्य और चन्द्रमा के समान प्र…
- Verse 20शीत, उष्ण ओर धूलि से रुक्ष वायु से शिथिल हुए उसके कृश अंगों की लटक रही त्वचा ही उसका वस्त…