Guru's AddaGuru's Adda

Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 38

सैंतीसवाँ सर्ग समाप्त अड़तीसवाँ सर्ग सायंकाल मेँ दोनों सेनाओं के युद्ध से निवृत्त होने पर भूत-प्रेतों से भीषण ओर बीभत्स रणभूमि का विस्तार से वर्णन ।

21 verse-groups

  1. Verses 1–7श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, भुजास्फोट करने वाले विजयी वीरो से पराजित योद्…
  2. Verse 8तदुपरान्त सेनापतियों ने मन्त्रियों के साथ विचार कर एक दूसरे के पास रण बन्द करने के लिए दू…
  3. Verse 9रणभूमि में श्रमवश सभी के यन्त्र, शरत्रास्त्र तथा पराक्रम मन्द पड़ गये थे, सभी ने समय पर र…
  4. Verse 10तदुपरान्त दोनों सेनाओं का एक एक योद्धा महान्‌ रथ के पताकदण्डकी चोटी पर रक्खे हुए लम्बे बा…
  5. Verse 11जैसे रात्रि सम्पूर्ण दिशाओं में किरणों से विशाल शुभ्र चन्द्रमा को घुमाती है, वैसे ही उसने…
  6. Verse 12तदुपरान्त महाप्रलयकी निवृत्ति होने पर पुष्करावर्तनामक मेघों की नाई दुन्दुभियाँ बजने लगीं,…
  7. Verse 13विशाल आकाशमण्डल में स्थित बाण आदि अस्त्र-शस्त्रों की नदियाँ मानस सरोवर से सरयू आदि नदियों…
  8. Verse 14जैसे भूकम्प के बाद वनस्पन्द मन्द पड़ जाता है और जैसे शरद्‌ ऋतु में समुद्र का लहराना कम हो…
  9. Verse 15तदनन्तर जैसे प्रलय के अन्त मेँ प्रलयकालीन एकमात्र समुद्र जलप्रवाह चारों दिशाओं में बहता ह…
  10. Verse 16जिससे मन्दराचल निकाला गया है, ऐसे क्षीर समुद्र के समान प्रशान्त और आवर्तों से (जलभौरियों…
  11. Verses 17–24थोड़ी देर में जैसे जैसे सैनिक निकलते गये, वैसे वैसे रणभूमि पूतनेश्वरी के पेट के समान भीषण…
  12. Verses 25–40सिर पर धारण किये हुए शिरोरत्नं ओर अंगदों (बाजू-बन्दों )की जगमगाहट से सैकड़ों इन्द्रधनुष उ…
  13. Verses 41–45वहाँ पर सैकड़ों रूघिर-नदियाँ बह रही थी, उनमें केश ही सेवाल थे, मुख ही कमल थे, चक्र ही आवर…
  14. Verse 46आभूषणं, बाणो, भालं से सारा युद्धस्थल व्याप्त था, भुशुण्डी के समूहों का वहाँ चारों ओर ढेर…
  15. Verses 47–48बह रही रुधिर की नदी के अगल बगल लगे हुए मुर्दो पर गड हुए कुन्त ही उन्नत वृक्ष थे, वे ऐसे प…
  16. Verses 49–51रुधिर की नदी के तीर पर लगे हुए ऊँचे ऊँचे भाले ही उसमें ऊँचे ऊँचे वन वृक्ष थे ओर रुधिर के…
  17. Verse 52रुधिर के प्रवाह में चमक रहे सफेद वस्त्र ही वहाँ पर फेन समूह था, चलने के लिए आज्ञप्त ओर शी…
  18. Verses 53–55रहे थे । वहाँ पर सुन्दर ताड के वृक्षों के समान ओर ताड से भी ऊँचे वेतालो ने ताल शब्द के सा…
  19. Verse 56शवों के ढेर के अन्दर विद्यमान जीवित योद्धा से स्पन्दयुक्त शव वहाँ पर स्पन्दन की भीति देते…
  20. Verse 57जिन योद्धाओं में कुछ ही जीवन शेष था, उन्होने खाने के लिए गर्दन उठाए हुए कुत्ते ओर कौओं को…
  21. Verse 58वह रणभूमि क्या थी मृत्यु का उद्यान था । मर कर इधर उधर गिरे हुए असंख्य घोडे, हाथी, नर, नरप…