Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 38, Verses 53–55
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 38, verses 53–55 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 53-55
संस्कृत श्लोक
इतश्चेतश्च निपतत्कबन्धरवदानवम् ।
ऊर्ध्वस्थूलाक्षचक्रौघच्छिन्नसैन्यद्रवज्जनम् ॥ ५३ ॥
रक्तनिःस्वनभाङ्कारफेत्कारार्धमृतारवम् ।
शिलामुखललद्रक्तधाराधूतरजःखगम् ॥ ५४ ॥
सुतालोत्तालवेतालतालताण्डवसंकटम् ।
पर्यस्तरथदार्वन्तरर्धान्तरितसद्भटम् ॥ ५५ ॥
हिन्दी अर्थ
रहे थे । वहाँ पर सुन्दर ताड के वृक्षों के समान ओर ताड से भी ऊँचे वेतालो ने ताल शब्द के
साथ ताण्डव नृत्य आरम्भ कर दिया था अतएव वह स्थान ओर संकटपूर्ण हो गया था, ओधे
गिरे हुए (अस्त-व्यस्त) रथों की लकड़ियों के अन्दर जीवित योद्धा थोड़ा बहुत छिपे हुए
थे