Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 38, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 38, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
अन्तस्थसज्जीवभटस्पन्दिस्पन्दनभीतिदम् ।
रक्तकर्दमपूर्णास्यकिंचिज्जीवकृपाच्छवम् ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
शवों के ढेर के अन्दर विद्यमान जीवित योद्धा से स्पन्दयुक्त शव वहाँ पर
स्पन्दन की भीति देते थे यानी मालूम होता था कि शव मेँ स्पन्दन क्रिया हो रही हे । रुधिर के
कीचड़ से जिनका मुंह भरा था और थोड़ा सा जीवन जिनमें शेष था, ऐसे शवों पर वहाँ बड़ी
तरस आती थी