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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 38, Verse 57

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 38, verse 57 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 38 · श्लोक 57

संस्कृत श्लोक

किंचिज्जीवनरोद्ग्रीवदुःखदृष्टश्ववायसम् । एकामिषोत्कक्रव्यादयुद्धकोलाहलाकुलम् । एकामिषार्थयुद्धेहामृतक्रव्यादसंकुलम् ॥ ५७ ॥

हिन्दी अर्थ

जिन योद्धाओं में कुछ ही जीवन शेष था, उन्होने खाने के लिए गर्दन उठाए हुए कुत्ते ओर कौओं को बड़े क्लेश से देखा यानी उन्हें भक्षणोन्मुख देखकर उन्हें बड़ा दुःख हुआ, जहाँ तहाँ एक ही मांसपिण्डों को खाने के लिए उत्सुक कोए, कुत्ते, गीदड़ आदि का युद्ध एवं तज्जनित कोलाहल हो रहा था ओर जहाँ तहौँ एक ही मांसपिण्ड के लिए युद्धेच्छा से मरे हुए मांसाहारी जीव कोए, कुत्ते, गीदड़ आदि बिखरे पड़े थे