Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker) · Sarga 17
6 verse-groups
- Verses 1–2परस्पर विरोधियों में एककी वृद्धि होने पर उसके सजातीय कुल की वृद्धि होने से अन्य का क्षीण…
- Verses 3–12श्रीरामचन्द्रजी मे उक्त गुणो के अभाव की शंका का निराकरण करते है । हे श्रीरामचन्द्रजी, आप…
- Verses 13–35वैराग्य-प्रकरण के अनन्तर मुमुक्षु-व्यवहार नामक प्रकरण की रचना की गई है, इसमें एक हजार श्ल…
- Verses 36–39४ कंकणता ओर तरंगता का सुवर्ण, जल के स्वरूप के बिना निरूपण नहीं हो सकता, अतः वे मिथ्या हैं…
- Verses 40–48रहित हो जाता है अतएव देहयुक्त होने पर भी देह रहित सा संसार में रहने पर भी असंसारी हो जाता…
- Verses 49–50विस्तारशून्य प्रदेश मेँ अतिविस्तारयुक्त जगत् की प्रतीति कैसे होती है। ऐसी शंका होने पर छ…