Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2) · Sarga 203

10 verse-groups

  1. Verse 1हे सौभाग्यशाली राघव, आप सरीखे महापुरुष कुलदीपक से युक्त पुत्र-पौत्र, सेवक, बन्धुबान्धव, प…
  2. Verse 2श्रीरामचन्द्रजी अपने मनोज्ञ चन्द्रवदन से ऐसे सुशोभित हुए जैसे कि अमृत से पूर्ण मनोहर चन्द…
  3. Verse 3तत्त्वज्ञानविशारद वामदेव आदि सब लोगों ने वाह भगवान्‌ श्रीवसिष्ठजी ने क्या उत्तम ज्ञान का…
  4. Verses 4–5शान्त अन्तःकरणवाले राजा दशरथ प्रसन्नता से अत्यन्त सुशोभित हुए । वे अत्यंत सन्तोष से पूर्ण…
  5. Verse 6श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्‌, आप अतीत और वर्तमान के अधिपति हैं, आपने हमारा यह अज्ञा…
  6. Verse 7हे प्रभो, हम लोग पहले केवल शरीर में आत्मदुष्टिवाले थे इस समय आपके अनुग्रह से सर्वत्र सर्व…
  7. Verse 8मैं सर्वात्मा होकर सम्पूर्णरूप से स्थित हूँ, नीरोग हो गया हूँ, मेरी सकल आशंकाएँ मिट चुकी…
  8. Verses 9–10कभी खेदवान्‌ न होने के लिए मैं आनन्दित हू, चिरकाल के लिए मैं सुखी हूँ, कभी अस्त न होने के…
  9. Verse 11आपके अनुग्रह से आज मुझे यह दिव्य साम्राज्यपदवी प्राप्त हो चुकी है जिसमें स्थित हुए मेरे ल…
  10. Verses 12–52मेरी मति पूर्णतया प्रसन्न हो चुकी है, मेरा समस्त शोक निवृत्त हो गया है, मैं अलौकिक शान्ति…