Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 203, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 203, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 203 · श्लोक 6
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्, आप अतीत और वर्तमान के अधिपति हैं, आपने हमारा यह अज्ञान
वैसे ही पूर्णतया मिटा दिया है जैसे अग्नि सुवर्ण का मल (अन्यान्य धातुओं की मिलावट) पूर्णतया
मिटा देता है