Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 93
बानबेवाँ सर्ग समाप्त (८) राजा शिखिध्वज ने अग्नि में शुद्ध करके किसी एक श्रोत्रिय ब्राह्मण से वह कमण्डलु लिया था, अब फिर अग्नि में उसे शुद्ध करके किसी एक दूसरे श्रोत्रिय ब्राह्मण को दे दिया, यह “येनैव” इत्यादि से मालूम पड़ता है ।
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- Verses 1–6तिरानबेवाँ सर्ग सारी सामग्री जलाकर छोड़ देने के लिए तैयार राजा शिखिध्वज को रोककर कुम्भ द्…
- Verses 7–8राजा शिखिध्वज ने कहा : हे देवपुत्र, अहो, चिरकाल के बाद आपसे ज्ञान पाकर सब वस्तुओं में ममत…
- Verses 9–11वस्तुओं के त्याग से जो सुख हआ, उसका अभिनय कर रहे राजा शिखिध्वज कहते हैं। ज्यों-ज्यों विवि…
- Verses 12–18बाह्य पदार्थो के त्यागमात्र से, भ्रान्ति से बालक की नाई उस राजा शिखिध्वज के सर्वत्यागजन्य…
- Verses 19–20शरीर का कोई अपराध नहीं है, यह दिखलाते हैं। यह बेचारा तपस्वी शरीर तो जड़ और मूकात्मा है। इ…
- Verse 21जिसका अपराध है, उस अन्य व्यक्ति को दिखलाते हैं। जैसे एकान्त में अवस्थित तपस्वी को उन्मत्त…
- Verses 22–23सुख और दुःख की उत्पत्ति का स्थान होने से शरीर अपराधी क्यों नहीं है, इस पर कहते हैं। सुख,…
- Verses 24–30हे कमलनेत्र, शरीर का त्याग करने से भी तुम्हारा सर्वत्याग सिद्ध नहीं हो जाता, क्योंकि वह व…
- Verses 31–42राजा शिखिध्वज ने कहा : हे सर्वं तत्त्वविदों मे श्रेष्ठ ऋषे, सब जगह छोड़ने योग्य ओर सर्वदा…
- Verses 43–47जीवनामवाला ओर क्रिया की प्रधानता से प्राणनामवाला) जो चित्त है, यह सर्वशब्द से कहा गया हे…
- Verse 48वह सर्वत्याग परिच्छिन्न आत्मा का ग्रहण करने पर सिद्ध नहीं होता, इस आशय से कहते हैं। हे त्…
- Verse 49अपरिच्छिन्न आत्मा का ग्रहण करने पर तो आप ही सब की आत्मा ठहरते है, इसलिए किसी दूसरे के द्व…
- Verse 50जो सब छोड रहा है उसने तो सबकी शून्यता ही मान ली, फिर सब उसके अधीन बनकर लब्ध कैसे होंगे, इ…
- Verses 51–52इसीलिए सर्वत्याग होने पर सबका बाध हो जाने के कारण परमार्थद्ृष्टि से आत्यन्तिक स्नेह का क्…
- Verse 53सर्वत्याग में शून्यतापत्ति का वारण करते हैं। राज्यादि सम्पूर्ण वस्तुओं का त्याग कर देने प…
- Verse 54परिशिष्ट विति अपने से अतिरिक्त है, अतः उससे अपना कौन-सा पुरुषार्थ सिद्ध होता है, इस पर कह…
- Verses 55–58अतिरिक्त ओर सब कुछ भयंकर दुःखरूप है - इसे विचारपूर्वक ॐ यों स्वीकार कर आप उसी का आचरण कीज…
- Verses 59–61सर्वत्याग मे वैभव की हानि होती है, इसका खण्डन करते हैं। जो पुरुष सबका त्याग कर देता है उस…
- Verses 62–64हे महाराज, सर्वत्यागसम्पूर्ण सम्पत्तियों का निवासस्थान है, क्योकि जो कुछ नहीं लेता उसे सब…