Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 82
इक्यासीरवौँ सर्ग समाप्त बयासीवाँ सर्ग अणुता ओर स्थूलता सिद्धि के उपाय, ज्ञानसाध्य वस्तु, योगियों के परकाय में प्रवेश तथा भोग आदि का युक्तिपूर्वक वर्णन ।
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- Verse 1इस तरह देह आदि अग्नि और चन्द्रस्वरूप है, इसका परिज्ञानकर तीनों धारणाओं के अभ्यास से परिष्…
- Verses 2–9उनमें सबसे पहले, अणुत्व की प्राप्ति के लिए देह का विलोप कर देना अत्यन्त आवश्यक है, इसलिए…
- Verses 10–11यों सूक्ष्म शरीर कैसे किया जाता है, यह कहकर स्थूलभाव से अपनी इच्छा के अनुसार नानाविध शरीर…
- Verses 12–13हड्डी आदि की कल्पना का प्रकार बतलातेहै। ओर उसके बाद वही कुण्डलिनी दृढ़ भावना के वश से भीत…
- Verses 14–22योगसिद्धि के अनुसार कहे गये स्थूल और सूक्ष्म भावप्राप्तिक्रमों का उपसंहार कर उनसे विलक्षण…
- Verse 23तब किस सूर्य से उसका नाश होता है, उसे कहते है । आत्मा में ही आत्मभावना से "सर्वव्यापक, नि…
- Verses 24–27इस ज्ञानसिद्धि के दृढ़ हो जाने पर भी जीवन्मुक्त महात्माओं को ऐच्छिक विनोद के लिए स्थूल सू…
- Verse 28वह ब्रह्माकाशता ही इसकी निरतिशय अणिमादि सर्वसज्रिद्धियाँ है, इस अभिप्राय से उपसंहार करते…
- Verses 29–34सर्वप्रथम पूर्व देह के परित्याग में उपाय बतलाते हैं। जिस तरह पवन से पुष्प में से मोद (सुग…