Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 78
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- Verses 1–30उस समय इस संसार से वे दोनों विरक्त हो उठे थे। उन्होने अध्यात्मशास्त्र में ही दृढ़ अभ्यास…
- Verses 31–38अहो, ये जितने मन, बुद्धि, इन्द्रिय आदि पदार्थ हैं, वे सबके सब चिद्विलास को परिच्छिन्न बना…
- Verse 39इन कारणों से जगत् की सत्ता का अधिष्ठानसत्ता से पृथक् निरूपण न हो सकने के कारण यह केवल म…
- Verses 40–52इसीलिए नाम, रूप, विशेषो का प्रलय होनेपर जगत्-सत्ता मायाशबल ब्रह्मात्मना ही अवस्थित रह जा…