Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 78, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 78, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 78 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
अनन्ययैव या शत्तया जगज्जृम्भिकया स्थिता ।
सत्ता मायातिरेकेण नान्या संभवतीह हि ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
इन कारणों से जगत् की सत्ता का अधिष्ठानसत्ता से पृथक् निरूपण न हो सकने के कारण यह
केवल मायारूप ही है, यह कहते हैं।
जगत् का निर्माण करनेवाली ब्रह्म से अभिन्न शक्ति से जो अधिष्ठानसत्ता विद्यमान है, उसीसे
जगत्-सत्ता अतिरिक्त-सी भासती है, यहाँ माया से अतिरिक्त किसी दूसरी सत्ता का संभव है ही
नहीं