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Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 68

सड़सठवाँ सर्ग समाप्त अड़सठवाँ सर्ग लक्षणों से चार तरह का मौन और उसमें भी सुषुप्तिसम्बन्धी मौन तुर्यातीत पद में प्रतिष्ठित है - यह वर्णन ।

9 verse-groups

  1. Verses 1–5महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामभद्र, आप सुषुप्तमोनवान्‌ होकर, चित्त की विलासिता छोडकर…
  2. Verses 6–7गया हे । रामभद्र, मोनविद्‌ लोगों ने चार प्रकार का बतलाया है-वाणी का मौन, इन्द्रियमोन, काष…
  3. Verses 8–10उनमें प्रत्येक का लक्षण बतलाते हैं। वाणी का निरोध वाणी का मौन, हटात्‌ इन्द्रियों का निग्र…
  4. Verse 11यद्यपि तीनों मौनों में मौनत्व सिद्ध है तथापि वे मलिन मन का जो दृढ़ निश्चय है तत्स्वरूप ही…
  5. Verses 12–13ऐसी परिस्थिति मे मलिन मन के दढ निश्वयरूप मौन से युक्त काष्ठतापस समाधि में स्थित कैसे रहता…
  6. Verses 14–15अथवा पूर्णात्मस्थिति की लीला से पूर्वोक्त तीनों मौन बन्धनस्वरूप ही हैं, इसलिए इनका त्याग…
  7. Verse 16तत्त्वसाक्षात्कार के सिद्ध हो जाने पर इसकी भी अनायास ही सिद्धि हो जाती है, अतः पूर्वोक्त…
  8. Verses 17–28इस अवस्था में यह अनेकता की कल्पना न तो उत्थित होती है और न शान्त ही होती है। (ज्ञान से बा…
  9. Verses 29–31तीन भूमिकाएँ हैं वे जाग्रत ओर स्वप्नावस्था में स्थित भी तत्त्वज्ञानियों को क्रमशः हुआ करत…