Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 68, Verses 6–7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 68, verses 6–7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 68 · श्लोक 6,7
संस्कृत श्लोक
एतयोर्यो भवेद्भावः शान्तयोर्मुनिनाथयोः ।
चित्तनिश्चयरूपात्मा मौनशब्देन स स्मृतः ॥ ६ ॥
चतुष्प्रकारमाहुस्तं मौनं मौनविदो जनाः ।
वांग्मौनमक्षमौनं च काष्ठं सौषुप्तमेव च ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
गया हे । रामभद्र, मोनविद् लोगों ने चार प्रकार का बतलाया है-वाणी का मौन, इन्द्रियमोन, काष्ठमौन
और सुषुप्तमोन