Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 58

सत्तावनवाँ सर्ग समाप्त अड्डावनवाँ सर्ग तत्त्वज्ञान से अविद्यासहित वासना का नाश तथा उसीसे अर्जुन की कृतार्थता -यह वर्णन |

5 verse-groups

  1. Verse 1अर्जुन ने कहा : हे अच्युत, तुम्हारे प्रसाद से (अनुग्रह प्रयुक्त तुम्हारे उपदेश से) वासनास…
  2. Verse 2इस प्रकार यद्यपि अर्जुन ने अपनी कृतार्थता दिखलाई, तथापि अपने उपदिष्ट तत्वज्ञान से समूल वा…
  3. Verses 3–5इस विषय में श्रुति प्रमाण है यदा सरवे प्रमुच्यन्ते कामा येऽस्य हृदि श्रिताः । अथ मर्त्योऽ…
  4. Verse 6उसके दर्शन में श्रवण आदि से परिपुष्ट की गयी भलीभाँति अभ्यस्त निदिध्यासन नाम की उसकी भावना…
  5. Verses 7–17स्थिति कहना तो अत्यन्त ही असंभावित है, यह कहते हैं। जिसकी प्राप्ति में ये घट, पट आदि सभी…