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Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 115

6 verse-groups

  1. Verses 1–10महाभोक्ता, महाकर्ता ओर महात्यागी हो जाओ | भृंगीश ने कहा : हे प्रभो, एसे कोन से लक्षण हैं,…
  2. Verses 11–20(समस्त शंकाओं का पिण्ड छोडकर, यह जो अंश कहा गया है, उसीकी विशद व्याख्या करते है । हे महाभ…
  3. Verses 21–38महाभोक्ता के लक्षण कहते है । जो किसीसे द्वेष नहीं करता, जो किसीकी अभिलाषा नहीं करता ओर जो…
  4. Verse 39विक्षेप के हेतु सुख-दुःखों से; जय, पराजय आदि क्रिया-योगों से तथा लाभअलाभों से जिस पुरुष क…
  5. Verses 40–42मलों से निर्मुक्त वृत्तिवाले होकर निर्वाण पद को प्राप्त कीजिये
  6. Verse 43हे प्रिय, इस संसार में जो कुछ भी दिखाई पडता है, वह सब कल्पो में प्रसिद्ध कार्य और कारण का…