Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 115
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- Verses 1–10महाभोक्ता, महाकर्ता ओर महात्यागी हो जाओ | भृंगीश ने कहा : हे प्रभो, एसे कोन से लक्षण हैं,…
- Verses 11–20(समस्त शंकाओं का पिण्ड छोडकर, यह जो अंश कहा गया है, उसीकी विशद व्याख्या करते है । हे महाभ…
- Verses 21–38महाभोक्ता के लक्षण कहते है । जो किसीसे द्वेष नहीं करता, जो किसीकी अभिलाषा नहीं करता ओर जो…
- Verse 39विक्षेप के हेतु सुख-दुःखों से; जय, पराजय आदि क्रिया-योगों से तथा लाभअलाभों से जिस पुरुष क…
- Verses 40–42मलों से निर्मुक्त वृत्तिवाले होकर निर्वाण पद को प्राप्त कीजिये
- Verse 43हे प्रिय, इस संसार में जो कुछ भी दिखाई पडता है, वह सब कल्पो में प्रसिद्ध कार्य और कारण का…