Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 108
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- Verses 1–12एक सौ सातवाँ सर्गं समाप्त एक सौ आठवाँ सर्ग क्रोध की परीक्षा करने के लिए माया से चूडाला का…
- Verses 13–21ये एक दूसरे के सामने ही मुख किये हुए हैं, बड़े आनन्द में मस्त हैं, प्रबल काममद के कारण इन…
- Verses 22–28रतिराग से बाधित हुए वे क्रोध आदि एकान्त में जार के साथ नाता जोड़ने में बाधक नहीं हो सकते…
- Verses 29–39राजा शिखिध्वज ने कहा : हे बाले, मेरे अन्तःकरण में तो तुम्हारे कृत्य से, आकाश में वृक्ष की…