Guru's AddaGuru's Adda

Utpatti Prakarana (Creation) · Sarga 59

अद्रावनर्वौ सर्ग समाप्त उनसठवाँ सर्ग राजा के जी उठने के हर्ष से नगर ओर अन्तःपुर में उत्सव, जीवन्मुक्त राजा पद्म और दो लीलाओं का चिरकाल तक राज्यभोग और तदुपरान्त मुक्तिका प्रतिपादन ।

6 verse-groups

  1. Verse 1श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स, देवी सरस्वती पूर्वोक्त प्रकार से राजा ने जो वर माँगा था, "उसे…
  2. Verses 2–9राजा ने उस लीला का बारबार आलिंगन किया और लीला ने भी मरकर फिर वापिस आये हुए राजा का बार-बा…
  3. Verses 10–11वहाँ पर शरत्‌काल के तुल्य सफेद रेशमी वस्त्रो के चँदवे तने थे, रूपवती ललनाओं के मुखों से उ…
  4. Verses 12–15को पूर्वोक्त रीति से सरस्वती के प्रसाद से और अपने पौरुष से वह तीनों लोकों का कल्याण प्राप…
  5. Verses 16–17दोनों लीलाओं से युक्त प्रशंसनीय राजा पद्म ने, जिसे श्रीसरस्वती देवीजी द्वारा उपदिष्ट ज्ञा…
  6. Verse 18अपने राज्य का, जो प्रजाओं के नित्य अभ्युदय से दोषरहित था, शास्त्रानुसारी होने के कारण विद…