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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 59, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 59, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

यदुदयविशदं विदग्धमुग्धं समुचितमात्महितं च पेशलं च । तदखिलजनतोषदं स्वराज्यं चिरमनुपाल्य सुदंपती विमुक्तौ ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

अपने राज्य का, जो प्रजाओं के नित्य अभ्युदय से दोषरहित था, शास्त्रानुसारी होने के कारण विद्वानों के भी मन को हरनेवाला था, अपनी कुलपरम्परा की मर्यादा के योग्य था, भोग, यश और धर्म देनेवाला होने के कारण अपने लिए भी हितकर था, लोगों के चित्त के अनुरंजन में दक्ष था, अतएव सम्पूर्ण लोगों को सन्तोष देनेवाला था, चिरकाल तक पालनकर वे सुन्दर दम्पती विमुक्त हो गये