Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 59, Verses 16–17
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 59, verses 16–17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 59 · श्लोक 16,17
संस्कृत श्लोक
स ज्ञप्तिज्ञानसंबुद्धो राजा लीलाद्वयान्वितः ।
चक्रे वर्षायुतान्यष्टौ तत्र राज्यमनिन्दितः ॥ १६ ॥
जीवन्मुक्तास्त इत्येवं राज्यं वर्षायुताष्टकम् ।
कृत्वा विदेहमुक्तत्वमासेदुः सिद्धसंविदः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
दोनों लीलाओं से युक्त प्रशंसनीय राजा पद्म ने, जिसे श्रीसरस्वती देवीजी
द्वारा उपदिष्ट ज्ञान से भलीर्भोति आत्मतत्व का ज्ञान हो चुका था, वहाँ पर अस्सी हजार
वर्ष तक राज्य किया । वे जीवन्मुक्त, जिनका आत्मतत्त्वज्ञान खूब बद्धमूल हो गया था, इस
प्रकार अस्सी हजार वर्ष तक राज्य करके विदेहमुक्ति को प्राप्त हुए