Guru's AddaGuru's Adda

Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker) · Sarga 5

चौथा सर्ग समाप्त पाँचवाँ सर्ग पौरूष के प्रबल होने पर अवश्य फलप्राप्ति में एवं दैव की पुरुषार्थ से अभिन्नता में युक्ति ओर दृष्टान्तो का प्रदर्शन ।

12 verse-groups

  1. Verse 1पूर्व में जो यह कहा था कि दैव पौरुष से अतिरिक्त नहीं है, दैव से पौरुष प्रबल है और पौरुष स…
  2. Verses 2–6विद्या तृप्ति आदि के समान द्ृष्टफलक है, उसके साधन में शास्त्रीय नियम का क्या उपयोग है ? इ…
  3. Verse 7श्रिभिऋणेऋणवान्‌ जायते“ इस श्रुति से मनुष्य, देवता आदि का ऋणी, युना जाता है ओर (तस्मादेषा…
  4. Verse 8शास्त्रीय मार्गमे यत्न कर रहे लोगों को भी कभी कभी रोगादि अनर्थ कर्यो प्राप्त होते हैं ? ऐ…
  5. Verses 9–14उसको भी जीत लेना चाहिए यह भाव है। अपने उत्कृष्ट पौरुष का अवलम्बन कर दाँतों से दाँतों को प…
  6. Verses 15–22जैसे विष्णु असुरो द्वारा प्रयुक्त माया रभ्‌ स्वयम्‌“ विशेषण निःशेषतता का सूचक है, अन्य से…
  7. Verses 23–24एव“ पद योग्य जन्म का लाभ होने पर भी पुरुषार्थ की सिद्धि न करने पर फिर पुरुषार्थ सिद्धि की…
  8. Verses 25–27क्योंकि प्रत्यक्षावगमं धर्म्य सुसुखं कर्तुमव्ययम्‌“ (अनेक जन्मो से संचित निष्काम कर्म का…
  9. Verses 28–29यदि बहुत परिश्रम की अपेक्षा नहीं है, तो पीछे पौरुष करेगे, इसी समय उसकी क्या आवश्यकता है 2…
  10. Verse 30यदि ऐसा है, तो सभी लोग क्यो यत्न नहीं करते, इस पर कहते है । अनर्थ (दुर्गति) का कारण होने…
  11. Verse 31आदि में समर्थ भुजाओं से अलंकृत अवस्था से (योवनावस्था से) लेकर पद-पदार्थ ज्ञान में निपुण (…
  12. Verse 32श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : महामुनि श्रीवसिष्ठजी के यों कहने पर दिन बीत गया और सूर्य भगवान अस…