Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker) · Sarga 16
पन्द्रहववोँ सर्ग समाप्त सोलहवाँ सर्ग साधुसंगतिरूप चतुर्थ द्वारपाल का वर्णन तथा चारों में से प्रत्येक के सेवन में भी पुरुषार्थहेतुता का वर्णन ।
4 verse-groups
- Verses 1–17साधुसमागमरूप चतुर्थ द्वारपाल का वर्णन कर रहे और चारों में से प्रत्येक के विषय में किया गय…
- Verses 18–20सम्पूर्ण द्वारपालों की एक ही साथ प्रशंसा करने की इच्छा से पूर्वोक्त का अनुवाद करते हैं ।…
- Verses 21–29अर्थात् गुणार्जन के लिए अत्यन्त उद्योग करना चाहिए
- Verses 30–35सात्विक देव आदि जन्म के लिए प्रयत्न करना चाहिए, देव आदि जन्म प्राप्त होने पर बिना परिश्रम…