Vairagya Prakarana (Dispassion) · Sarga 7
छठर्वौ सर्ग समाप्त सातवाँ सर्ग राजा की प्रशंसा कर श्रीविश्वामित्रजी का अपने आगमन का प्रयोजन कहना तथा राक्षसो के विनाश के लिए श्रीरामचन्द्रजी को माँगना |
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- Verses 1–2वाल्मीकिजी ने कहा : भरद्वाज, महाराज के आश्चर्यपूर्ण उक्त विस्तृत वाक्य को सुनकर महामुनि व…
- Verse 3महाराज, मैं जो कहना चाहता हूँ, उसके विषय मेँ आप कर्तव्य का निश्चय कीजिए और धर्म का परिपाल…
- Verse 4पुरुषश्रेष्ठ, में सिद्धिलाभ के लिए यज्ञ आरम्भ करता हूँ । भीषण राक्षस मेरे यज्ञ में विघ्न…
- Verses 5–7जब-जब मैं यज्ञ द्वारा देवताओं का भजन पूजन करता हूँ तब तव राक्षस मेरे यज्ञ को छिन्न भिन्न…
- Verse 8राजन्, क्रोध करके अर्थात् शापदान द्वारा उसका प्रतीकार करने की मेरी इच्छा नहीं होती, कार…
- Verses 9–11के समान ग्लानिकरहे
- Verses 12–13राजन् आपके पुत्र श्रीरामचन्द्रजी मत्तसिंह के समान पराक्रमशाली अत्यन्त शोभासम्पन्न, महेन्…
- Verse 14मेँ भी निःसीम प्रभाव से युक्त और विविध अस्त्र, शस्त्र और विद्या देकर श्रीरामचन्द्र का कल्…
- Verse 15जैसे क्रुद्ध सिंह को देखकर मृग वन में पैदा हुए इरिण की (तृणविशेष की) ओट में खड़े नहीं हो…
- Verses 16–17जैसे करुद्ध सिंह के सिवा दूसरा कोई जीव मत्त हाथियों से नहीं लड़ सकता, वैसे ही श्रीरामजी क…
- Verse 18महाराज, जैसे मेघ की मुसलाधार वृष्टि को धूलि कण नहीं सह सकते, वैसे ही श्रीरामचन्द्रजी की ब…
- Verses 19–20महाराज, आप यह मेरा पुत्र है ऐसा प्राकृत स्नेह न कीजिए, क्योकि संसार में महात्मा पुरुषों क…
- Verse 21मैं जानता हूँ, महातेजस्वी वसिष्ठजी जानते हैं और अन्यान्य महात्मा भी जानते है कि कमलनयन श्…
- Verses 22–23यदि धर्म, महत्ता और यश की रक्षा करनी चाहिए, ऐसी आपकी वासना हो, तो मेरे इच्छित की सिद्धि क…
- Verse 24अतएव हे महाराज, इस विषय में आपके वशिष्ठ आदि मन्त्री अनुमति प्रदान करें । उनकी अनुज्ञा से…
- Verse 25हे राघव, आप अवसरज्ञ हे, जैसे मेरा यह यज्ञ का अवसर बीत न जाय वैसा कीजिए आपका कल्याण होगा,…
- Verse 26समय पर थोड़ा भी कार्य किया जाय, तो वह बहुत उपकारक होता है। असमय में बहुत भी उपकार किया जा…
- Verse 27धर्मात्मा महातेजस्वी मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्रजी यों धर्म-अर्थ से युक्त वाक्य कहकर चुप हो ग…
- Verse 28महानुभाव राजा दशरथ महर्षि के उक्त वचन सुनकर युक्तियुक्त उत्तर देने के लिए कुछ काल तक चुपच…