Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
न च मे क्रोधमुत्स्रष्टुं बुद्धिर्भवति पार्थिव ।
तथाभूतं हि तत्कर्म न शापस्तस्य विद्यते ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
राजन्, क्रोध करके अर्थात् शापदान द्वारा उसका प्रतीकार करने की मेरी इच्छा नहीं होती,
कारण कि क्रोधरहित होकर ही यज्ञानुष्ठान किया जाता हे और करुद्ध हुए बिना शाप देना नहीं बनता