Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
नात्येति कालः कालज्ञ यथायं मम राघव ।
तथा कुरुष्व भद्रं ते मा च शोके मनः कृथाः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, आप अवसरज्ञ हे,
जैसे मेरा यह यज्ञ का अवसर बीत न जाय वैसा कीजिए आपका कल्याण होगा, आप मन में शोक को जगह
नदीजिए