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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verses 12–13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, verses 12–13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 12, 13

संस्कृत श्लोक

तं पुत्रं राजशार्दूल रामं सत्यपराक्रमम् । काकपक्षधरं शूरं ज्येष्ठं मे दातुमर्हसि ॥ १२ ॥ शक्तो ह्येष मया गुप्तो दिव्येन स्वेन तेजसा । राक्षसा येऽपकर्तारस्तेषां मूर्धविनिग्रहे ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

राजन्‌ आपके पुत्र श्रीरामचन्द्रजी मत्तसिंह के समान पराक्रमशाली अत्यन्त शोभासम्पन्न, महेन्द्र के समान शौर्य सम्पन्न ओर राक्षसो के विनाश में दक्ष हैं अमोघ पराक्रमवाले काकपक्षधारी शूर-वीर अपने ज्येष्ठ पुत्रश्रीरामचन्द्रजी को आप मुझे दीजिए । मैं अपने दिव्य तेज से इनकी रक्षा करूँगा । यों मेरे तेज से सुरक्षित वे यज्ञ के विघ्वंसक राक्षसो के शिर काटने के लिए समर्थ हैं