Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
श्रुत्वा वचो मुनिवरस्य महानुभावस्तूष्णीमतिष्ठदुपपन्नपदं स वक्तुम् ।
नो युक्तियुक्तकथनेन विनैति तोषं धीमानपूरितमनोऽभिमतश्च लोकः ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
महानुभाव राजा दशरथ महर्षि के उक्त वचन
सुनकर युक्तियुक्त उत्तर देने के लिए कुछ काल तक चुपचाप बैठे रहे, क्योकि जिसका मनोरथ पूर्ण न
किया जाय ऐसा धीमान् पुरुष युक्तियुक्त कथन के बिना संतोष को प्राप्त नहीं होता